डार्क चॉकलेट भी है इम्युनिटी बूस्टर, जानिए इसके अमेज़िंग बेनिफिट्स

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चॉकलेट सभी की पसंदीदा होती है ,अगर आपको भी डार्क चॉकलेट खाना पसंद है, तो आपके लिए एक अच्छी ख़बर है, 70 प्रतिशत से अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट को कई स्वास्थ्य लाभों से जोड़ा गया है। 

डार्क चॉकलेट में पॉलीफेनोल्स होते हैं, एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट जो बेरीज, ग्रीन और ब्लैक टी जैसी चीज़ों में भी पाया जाता है। ये पॉलीफेनोल्स हृदय रोग, कैंसर और सूजन और अन्य कई विषाक्त पदार्थों और बीमारियों के मुक्त कणों से शरीर की कोशिकाओं की रक्षा करने में मदद करते हैं। एक अध्ययन ने बताया है कि डार्क चॉकलेट में किसी भी अन्य भोजन की तुलना में अधिक फेनोलिक एंटीऑक्सिडेंट होते हैं।

डार्क चॉकलेट कोको के बीज से बनाई जाती है, जो दुनिया में एंटीऑक्सीडेंट के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक है। सम्पूर्ण लाभ लेने के लिए डार्क चॉकलेट की ऑर्गनिक किस्म को चुनें जिसमें 70% से अधिक कोको सामग्री हो। ये चॉकलेट कैटेचिन, फ्लेवनॉल्स और पॉलीफेनोल्स से भरपूर होती हैं।

पोषण तत्व

डार्क चॉकलेट मिनरल का पावरहाउस है। डार्क चॉकलेट बहुत पौष्टिक होती है। एंटीऑक्सिडेंट के अलावा, डार्क चॉकलेट मिनरल्स और विटामिन से भरपूर है। आधा कप शुद्ध कोकोआ में लगभग निम्नलिखित पोषक तत्व मिलते हैं :

पोषण तत्व (आधा कप शुद्ध कोकोआ में )दैनिक मूल्य का प्रतिशत
राइबोफ्लेविन6 प्रतिशत
आयरन33 प्रतिशत
मैग्नीशियम53 प्रतिशत
कैल्शियम5 प्रतिशत
फॉस्फोरस30 प्रतिशत
नियासिन4 प्रतिशत
जिंक40 प्रतिशत
कॉपर80 प्रतिशत
मैंगनीज83 प्रतिशत
कैफीन99 मिलीग्राम
थियोब्रोमाइन880 मिलीग्राम
ओमेगा -6 फैटी एसिड378 मिलीग्राम
फाइबर11ग्राम

यह मोनोअनसैचुरेटेड, पॉलीअनसेचुरेट्स और सैचुरेटेड फैट भी प्रदान करती है। हालाँकि, इसमें कैलोरी, कैफीन और कुछ मात्रा में चीनी भी होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए।

डार्क चॉकलेट के स्वास्थ्य सम्बन्धी लाभ

1. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं

डार्क चॉकलेट में मौजूद फाइटोकेमिकल्स में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। लेकिन चीनी की मात्रा पर ध्यान दें, क्योंकि चीनी इंफ्लेमेटरी फ़ूड है। चॉकलेट के अधिकतम एंटी-इंफ्लेमेटरी लाभ प्राप्त करने के लिए, उच्च कोको सामग्री और कम चीनी वाली चॉकलेट का सेवन करें।

2. यह सर्क्युलेटरी सिस्टम के लिए अच्छी है

अध्ययनों से पता चला है कि डार्क चॉकलेट के सेवन से रक्त प्रवाह ( blood flow ) में सुधार होता है, रक्तचाप कम होता है, एलडीएल रक्त कोलेस्ट्रॉल (खराब कोलेस्ट्रॉल) कम होता है, एचडीएल बढ़ता है और स्ट्रोक के जोखिम को कम करती है। नीदरलैंड के एक विश्वविद्यालय में अधिक वजन वाले लोगों  पर किये गए एक अध्ययन में पाया गया डार्क चॉकलेट का सेवन करने से धमनियों में लचीलेपन को लौटाने में मदद मिली, सफेद रक्त कोशिकाओं को रक्त वाहिकाओं की दीवारों से चिपके रहने से भी रोका गया। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि धमनी कठोरता और सफेद रक्त कोशिका का चिपका होना दोनों ही हृदय रोग के कारण बनते हैं।

3. इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करती है

डार्क चॉकलेट में कोको के गुण मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन उसमे मौजूद चीनी की मात्रा पर ध्यान दें। इसमें इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को बढ़ाने की क्षमता होती है, जो ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में मदद करती है। इस तरह, यह टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को कम करती है। डायबिटीस के रोगियों में डार्क चॉकलेट खाने से टाइप 2 मधुमेह को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

4. यह मस्तिष्क के कार्य में सुधार करती है

डार्क चॉकलेट मस्तिष्क के कार्य में भी सुधार कर सकती है। बुजुर्गों में ये चॉकलेट मानसिक दुर्बलता को कम करने के लिए जानी जाती है। इनमें मौजूद कैफीन जैसे उत्तेजक मस्तिष्क के कार्य में सुधार कर सकते हैं।

5. डिप्रेशन को रोकने में मदद करती है

डार्क चॉकलेट में थियोब्रोमाइन भी होता है। थियोब्रोमाइन ऊर्जा देता है। चॉकलेट में एक और मूड-बूस्टिंग केमिकल फेनथाइलैमाइन होता है, जो शरीर में सेरोटोनिन में मेटाबोलाइज़ किया जाता है। सेरोटोनिन  मूड को नियंत्रित करने वाले महत्वपूर्ण रसायनों में से एक है।

6. डार्क चॉकलेट इम्यून सिस्टम को बूस्ट करती है

डार्क चॉकलेट के शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट अन्य पोषक तत्वों के साथ मिलकर इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने का काम करते है। कोको प्रतिरक्षा प्रणाली की इन्फ्लमेशन प्रतिक्रिया को नियंत्रित कर सकता है। डार्क चॉकलेट के शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट अन्य पोषक तत्वों के साथ मिलकर इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने का काम  करते है। कोको  प्रतिरक्षा प्रणाली की इन्फ्लमेशन प्रतिक्रिया को नियंत्रित कर सकता है। इन्फ्लमेशन को रोगजनकों, रसायनों, घाव, या संक्रमण से जोड़ा गया है। चॉकलेट में फ्लेवोनोइड्स होते हैं ,जो एंटी-इंफ्लेमेटरी हैं।

एंटीबॉडी का उत्पादन करने वाली कुछ कोशिकाओं पर कोको का लाभकारी प्रभाव होता है। एंटीबॉडी शरीर को बैक्टीरिया और बीमारी से लड़ने में मदद करते हैं। 

कोको का लिम्फोइड टिशूज पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लिम्फोइड मनुष्यों में इम्यून सिस्टम से तालमेल में मदद करते हैं। कोको लिम्फोइड अंगों को अधिक प्रभावी ढंग से टिशूज को बनाने में मदद करता है, जिससे बीमारियों से बचाव होता है।

7. रेड ब्लड सेल के वितरण (distribution ) को बढ़ावा देती है

अध्ययनों से पता चला है कि डार्क चॉकलेट लाल रक्त कोशिकाओं के फैलाव में सहायता करती है। RDW (रेड ब्लड सेल वितरण (distribution )को हृदय रोग से जोड़ा जाता है। जिस चॉक्लेट में फ्लेवोनोल्स और पॉलीफेनोल्स उच्च मात्रा में होते हैं, उनका नियमित सेवन RDW को काफी बढ़ा देता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है। चॉकलेट RDW को बेहतर बनाने में मदद करती है, इसका एक कारण उसमे आयरन की मात्रा होना भी है।

8. डार्क चॉकलेट शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव (stress) को कम करती है

 डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सिडेंट – शरीर में मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। मुक्त कण शरीर में बीमारियों का कारण बनते हैं। 

डार्क चॉकलेट में काफी मात्रा में पॉलीफेनोल सामग्री होती है, यह ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और मुक्त कणों से लड़ने में मदद करती है। डार्क चॉकलेट में अन्य पॉलीफेनोल एंटीऑक्सिडेंट युक्त खाद्य पदार्थों की तुलना में यह अधिक होता है। 

  • डार्क चॉकलेट – 1664mg प्रति 100g
  • मिल्क चॉकलेट – 236mg प्रति 100g
  • स्ट्रॉबेरी  –  235mg प्रति 100g
  • कॉफी –  214mg प्रति 100ml
  • अदरक – 202mg प्रति 100g

डार्क चॉकलेट खाने के नुकसान

डार्क चॉकलेट खाने के कई बेहतरीन स्वास्थ्य लाभ हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं।

इसमें कैफीन होता है

डार्क चॉकलेट में  कैफीन होता है, ज्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन रात में नींद ना आने की समस्या पैदा कर सकता है।

गुर्दे की पथरी के खतरे को बढ़ा सकती है

डार्क चॉकलेट में ऑक्सालेट्स नामक एक कॉम्पोनेन्ट होता है, जो गुर्दे की पथरी के खतरे को बढ़ा सकता है। यदि आपको गुर्दे की पथरी की समस्या है, तो आप डार्क-चॉकलेट का सेवन करने से बचें।

यह माइग्रेन बढ़ा सकती है 

माइग्रेन से पीड़ित कुछ लोगों में डार्क चॉकलेट समस्या को बढ़ा सकती है। हालांकि, ऐसे लोग भी हैं जो माइग्रेन से ग्रस्त हैं और डार्क चॉकलेट से उन पर प्रभाव नहीं पड़ता है। माइग्रेन की समस्या वाले लोगों को इसे खाने से बचना चाहिए।

किसी भी मीठे पदार्थ की तरह इसके सेवन में भी संयम जरूरी है। कुछ डार्क चॉकलेट में अधिक चीनी और फैट होता है। आम तौर पर कोको का प्रतिशत जितना अधिक होगा, उसमें चीनी उतनी ही कम होगी, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है। इसलिए खरीदते वक्त लेबल जरूर पढ़ें और एक दिन में 20-25  ग्राम से अधिक नहीं खानी चाहिए।

Kusum Kaushal
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