holi basil तुलसी - जड़ी बूटियों की रानी
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आयुर्वेद में, तुलसी का इसकी चिकित्सीय क्षमता मुख्य रूप से दमा और खांसी के लिए उल्लेख किया गया है। आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा पद्धति की 5000 वर्ष पुरानी प्रणाली है।

संस्कृत में तुलसी का अर्थ है “अतुलनीय या जिसकी तुलना न की जा सके “। हजारों साल पहले प्राचीन ऋषियों द्वारा तुलसी को भारत की चिकित्सा सम्बन्धी सबसे महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों में से एक माना गया था। उन्होंने इस जड़ी बूटी के स्वास्थ्य और उपचार सम्बन्धी गुणों को देखते हुए इसे अपने आप में भगवान घोषित कर दिया। तुलसी पौराणिक पृष्ठभूमि के साथ जड़ी बूटियों की रानी है। 

यह भगवान विष्णु के अवतार, भगवान कृष्ण की प्रिय मानी जाती है। तुलसी को तब किसी भी वैदिक पूजा अनुष्ठान में आठ अनिवार्य वस्तुओं में से एक के रूप में स्थापित किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर घर और मंदिर में तुलसी का पौधा हो।आज भी तुलसी को भारत के अधिकांश घरों में लगाया जाता है। तुलसी, हिंदू धर्म में पवित्र मानी जाती है और कई भारतीय घरों में ‘देवी ‘ के रूप में इसकी पूजा की जाती है। उपचार, धर्म, आध्यात्मिकता, संस्कृति और सौंदर्यशास्त्र में इसके निरंतर महत्व के कारण यह सबसे सम्मानित जड़ी बूटी है। 

(i) हरे पत्तों वाली तुलसी को ‘ श्री तुलसी’ और (ii) बैंगनी पत्तियों वाली तुलसी को ‘ कृष्ण तुलसी ’के नाम से जाना जाता है। इसका उपयोग विभिन्न बीमारियों के लिए किया जाता है।

मुख्य रूप से पवित्र तुलसी की 4 लोकप्रिय प्रजातियां हैं –

1. राम तुलसी  (ocimum sanctum)

2. कृष्णा तुलसी (ocimum tenuiflorum)

3. अमृता तुलसी (ocimum tenuiflorum)

4. वन तुलसी (ocimum gratissum)

तुलसी के पत्ते विटामिन ए, सी और के, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, आयरन और पोटेशियम जैसे खनिजों से भरपूर होते हैं। इसमें प्रोटीन और फाइबर भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है।

पोषक तत्व 2.6 ग्राम तुलसी में मात्रा
कैल्शियम (mg)4.6
विटामिन ए (mcg, RAE)6.9
बीटा कैरोटीन (mcg)  81.7
बीटा क्रिप्टोक्सांथिन (mcg)1.2
ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन (mcg)147
विटामिन k (mcg)10.8

                             

तुलसी के स्वास्थ्य सम्बन्धी लाभ

तुलसी के पौधे के आध्यात्मिक महत्व के बारे में हम सभी जानते हैं, लेकिन आइए हम तुलसी के लाभों को जानते हैं। पाचन को मजबूत करने से लेकर इम्मुनिटी को बढ़ाने तक, तुलसी के काफी लाभ हैं। कई बीमारियों को रोकने के लिए यह एक हर्बल उपाय है।

1. रोग से लड़ने वाले एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होती है: तुलसी के तेल में डीएनए संरचना और कोशिकाओं की रक्षा करते हुए फ्री रेडिकल्स डेमेज से लड़ने में मदद करने की क्षमता है। तुलसी में पानी में घुलनशील दो फ्लेवोनोइड एंटीऑक्सिडेंट, ओरिएंटिन और विसेनिनयर होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली ( immune system ) को मजबूत करते हैं, सेलुलर संरचना, डीएनए की रक्षा करते हैं और त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाती है। 

2. तनाव और चिंता को कम करती है : तुलसी में एक विशेष एजेंट होता है जो तनाव से राहत देता है। यह एंटी-स्ट्रेस एजेंट हमारे मस्तिष्क में हमारे न्यूरल हार्मोन जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन को संतुलित करने में मदद करता है। संतुलित होने पर ये हार्मोन, तनाव और चिंता के स्तर को कम करते हैं। तुलसी की चाय तनाव को कम करने में मदद करती है।

3. सर्दी और बुखार को कम करती है : तुलसी में एंटी बैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते है। यह गुण संक्रमण से लड़ने में मदद करते है और बुखार, ठंड और फेफड़ों में जमाव को कम करते है। तुलसी के पत्तों का रस शहद और अदरक के साथ लेने से अस्थमा, खांसी, ब्रोंकाइटिस और सर्दी के लक्षणों से राहत मिलती है।

तुलसी के पत्तों का काढ़ा, नीम के पत्ते, अदरक का पाउडर और काली मिर्च का पाउडर बुखार और इसके लक्षणों को कम करने की क्षमता रखता है। तुलसी की चाय मलेरिया और डेंगू बुखार से रहत देने में काफी प्रभावी है, खासकर बारिश के मौसम में। बुखार के दौरान तुलसी के पत्तों का पेस्ट ठंडे पैरों पर लगाने से लाभ होता है।

4. खांसी के लिए घरेलू उपाय: तुलसी के पत्तों का उपयोग खांसी और सर्दी के उपचार में किया जाता है। खांसी, जुकाम और बुखार को ठीक करने के लिए, तुलसी के फूल, अदरक,  काली मिर्च का काढ़ा शहद के साथ दिन में तीन से चार बार लेना चाहिए। यह खांसी और सर्दी के लक्षणों को कम करने के लिए अच्छा है। एक्सपेक्टोरेंट से पीड़ित व्यक्ति को तुलसी के पत्तों का रस और चीनी लेनी चाहिए। सूखी खांसी के लिए, तुलसी के पत्तों, प्याज और अदरक के रस का मिश्रण इसे ठीक करने में सहायक है।

5. कैंसर से बचाती है: तुलसी में कैंसर विरोधी गुण होते हैं। यह त्वचा, यकृत ( liver ), फेफड़े और मौखिक कैंसर को रोकती है। यह ट्यूमर की आक्रामक प्रकृति को भी कम करती है।

6. किडनी में स्टोन्स बनने से रोकती है: तुलसी में डिटॉक्सिफाइंग गुण होता है। यह हमारे शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को कम करता है, जो गुर्दे की पथरी को बनने से रोकता है। बस पानी में उबली हुई तुलसी की पत्तियां गुर्दे की पथरी के खतरे को कम कर सकती हैं।

7. लिवर की फंक्शनिंग को दुरुस्त रखती है: तुलसी के पत्ते लिवर के लिए भी अच्छे होते हैं। तुलसी अपने डिटॉक्सिफाइंग गुणों के कारण, हमारे शरीर से मेटाबोलिक वेस्ट को हटाने में मदद करती है। यह हमारे यकृत प्रणाली (hepatic system ) को detoxify करती है, और हमारे लीवर को स्वस्थ्य रखती है।

8. डायबिटीज के खतरे को कम करती है: तुलसी के पत्ते शुगर लेवल को कम करने में मदद करते हैं। यह मधुमेह के खतरे को कम करती है  और टाइप 2 मधुमेह के इलाज में मदद करती है। 

9. तुलसी हृदय रोग से बचाती है: तुलसी के पत्ते शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं, जिससे हृदय संबंधी रोगों को रोकने में मदद मिलती है। यह रक्त परिसंचरण ( blood circulation ) में सुधार करती है, हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। तुलसी के पत्ते दिल के लिए एक टॉनिक के रूप में भी काम करते हैं। 

10. वजन घटाने में मदद करती है: तुलसी विषाक्त अपशिष्ट ( toxic waste ) और कोलेस्ट्रॉल को कम करती है, यह वजन घटाने में सहायक है। यह सामान्य एमआई को बनाए रखने में मदद करती है और हमारे मेटाबोलिज्म में सुधार करती है।

11. पाचन में मदद करती है: यह अपच का इलाज करने में मदद करती है और भूख कम हो जाने पर उसे ठीक करने में भी प्रभावी है। पेट का  फूला हुआ महसूस होने पर उसका इलाज करने में सहायक है। यह हमारे गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट को आराम पहुंचती है।

12. एंटी -इंफ्लेमेटरी के रूप में कार्य करती है: तुलसी में मजबूत एंटी -इंफ्लेमेटरी गुण है जो विभिन्न प्रकार के रोगों और विकारों को ठीक करते है। इसमें यूजेनॉल ( eugenol ), सिट्रोनेलोल ( citronellol )  और लिनलूल ( linalool ) हैं। तुलसी के एंटी -इंफ्लेमेटरी गुण कई बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं।

13. घाव को जल्दी भर्ती है और संक्रमण से बचाती है: इसके पत्तों से बने अर्क को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है। कुछ लोग सर्जरी के बाद तुलसी का उपयोग करते हैं, ताकि घावों को संक्रमण से बचाया जा सके। 

त्वचा और बालों की देखभाल के लिए तुलसी के लाभ

तुलसी के सेवन सम्बन्धी कुछ सावधानियाँ

गर्भावस्था: तुलसी गर्भावस्था के दौरान या जो महिलाएं गर्भ धारण करना चाहती हैं, उनके लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती है। सुरक्षित पक्ष पर रहें और इस दौरान उपयोग करने से बचें। 

स्तनपान: स्तनपान के दौरान पवित्र तुलसी के उपयोग के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, इसलिए सुरक्षित पक्ष पर रहें और उपयोग से बचें।

मधुमेह: तुलसी रक्त शर्करा के स्तर को कम करती है। यह रक्त शर्करा (blood sugar ) के स्तर को नियंत्रित करती है। टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों को इंसुलिन या एंटीडायबिटीज़ दवाओं की खुराक को समायोजित करने की आवश्यकता हो सकती है।

हाइपोथायरायडिज्म: हाइपोथायरायडिज्म वाले लोगों में थायरॉयड हार्मोन का कम स्तर होता है, जिसे थायरोक्सिन कहा जाता है। तुलसी थायरॉक्सीन के स्तर को कम कर सकती है। इसके मरीज़ों को भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

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