आयुर्वेद के अनुसार शहद खाने का उचित तरीका

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शहद बहुत स्वास्थ्य वर्धक होता है। यह बालों के झड़ने, उच्च रक्तचाप, वजन घटाने और त्वचा की समस्याओं इत्यादि के लिए अद्भुत काम करता है। शहद में एंटीफंगल, एंटीबेक्टेरियल गुण होते हैं और इसमें कई पोषक तत्व भी होते हैं। आयुर्वेद में शहद के सम्पूर्ण गुण प्राप्त करने के लिए उसे किस प्रकार खाना चाहिए यह बताया गया है, उसे जानने से पहले शहद के कुछ मुख्य लाभ जानते हैं –

ऊर्जा (energy) में वृद्धि करता  है 

शहद में प्राकृतिक शर्करा होती है और हमारा शरीर इसे आसानी से पचा लेता है। यह एनर्जी बूस्टर के रूप में काम करता है। इसमें कैलोरी कम होती हैं, स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए मिठास के लिए चीनी के स्थान पर इसका प्रयोग कर सकते हैं।  

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

शहद में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और शरीर को अंदर से साफ रखते हैं। यह त्वचा को मुलायम  और चमकदार बनाए रखने में मदद करता है। यह पाचन में भी मदद करता है।

सर्दी खांसी को ठीक करने में मदद करता है

खांसी और जुकाम के इलाज के लिए शहद का उपयोग सदियों से किया जाता आ रहा है। सर्दी-जुकाम के लिए एक चम्मच शहद में एक चम्मच अदरक का रस मिलाएं।

कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में सहायक

शहद एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को कम करता है और एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) को बढ़ाता है।

घाव को भरने और जलन को ठीक करने में मदद करता है

शहद घाव और जलन को ठीक करने में मदद करता है। शहद त्वचा के लिए बहुत ही लाभदायक होता है । इसका उपयोग सीधे त्वचा पर किया जा सकता है और इसका कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता है।

ट्राइग्लिसराइड्स को कम कर सकता है

कई अध्ययनों ने नियमित शहद के सेवन को कम ट्राइग्लिसराइड के स्तर से जोड़ा है, खासकर जब इसका उपयोग चीनी के स्थान पर किया जाता है। 

क्या गर्म पानी या दूध में शहद मिलाकर सेवन करना उचित है ?

अधिकांश लोग सुबह उठने के बाद एक गिलास गर्म पानी में शहद मिलाकर पीते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह शरीर को तरोताजा रखता है, वजन घटाने में सहायक है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार क्या शहद का इस प्रकार गरम पानी या दूध में सेवन उचित है आइये जानते हैं।

आयुर्वेद क्या बताता है  ?

आयुर्वेद के अनुसार शहद को कभी भी गरम नहीं करना चाहिए और ना ही पकाना चाहिए।

आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार  शहद रॉ (कच्चे रूप ) में फायदेमंद होता है। गरम किया गया शहद धीरे धीरे पचता है, जो  शरीर में “आम ” पैदा कर सकता है, यह एक प्रकार का विषैला पदार्थ होता है, जो तब बनता है जब शरीर में पाचन सम्बन्धी समस्या होती है। जो कई अलग-अलग बीमारियों को जन्म दे सकता है।

शहद के लाभों को देखते हुए  इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। लेकिन इसे  प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसे सीधा स्रोत्र से प्राप्त करने की कोशिश करें और इसे कच्चा (raw ) खाया जाए। बाजार में बिकने वाले पैक्ड शहद को आमतौर पर अत्यधिक तापमान के तहत पहले से गरम किया जाता है और यह प्रॉसेस्ड होता है। यदि आप सोने जाने से पहले दूध में शहद डालकर पीना चाहते हैं , तो सुनिश्चित करें कि शहद मिलाने से पहले दूध को रूम टेम्प्रेचर पर उचित रूप से ठंडा होने दें फिर उसमे शहद मिलाएं।

वैज्ञानिक कारण भी है कि शहद को गरम क्यों नहीं करना चाहिए। इसे गरम करने पर कुछ रसायन निकल सकते है, जो सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। 

शहद के लिए अनुमत तापमान वृद्धि 140 डिग्री से कम है, जो गर्म दूध के गिलास से बहुत कम है। इसलिए जब गर्म दूध या पानी में शहद मिलाया जाता हैं, तो शहद के गुण बदल जाते हैं और स्वास्थ्य के लिए विषाक्त और हानिकारक हो जाते हैं। 

Kusum Kaushal
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