भावनात्मक ज्ञान( Emotional intelligence ) – जीवन के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कौशल

भावनात्मक बुद्धिमत्ता क्या है

भावनात्मक बुद्धिमत्ता क्या है?

भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EQ) अपनी और दूसरों की भावनाओं को समझने और उन्हें सकारात्मक तरीकों से नियंत्रित करने की क्षमता है, ताकि तनाव को कम किया जा सके, प्रभावी तरीके से संवाद किया जा सके, दूसरों के प्रति सहानुभूति रखी जा सके और चुनौतियों व टकरावों पर काबू पाया जा सके। भावनात्मक बुद्धिमत्ता मज़बूत रिश्ते बनाने, शैक्षणिक और पेशेवर सफलता पाने और व्यक्तिगत लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद करती है। यह अपनी भावनाओं से जुड़ने, अपने इरादों को कार्यों में बदलने और जीवन में जो चीज़ें मायने रखती हैं, उनके बारे में सही फ़ैसले लेने में भी सहायक है।

मनोवैज्ञानिक और लेखक “डैनियल गोलमैन” पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भावनात्मक बुद्धिमत्ता की अवधारणा को प्रस्तुत किया, यह अवधारणा पाँच घटकों से मिलकर बनी है।

1. आत्म-जागरूकता

आत्म-जागरूकता स्वयं की भावनाओं और मनोदशाओं को पहचानने के साथ साथ दूसरों की भावनाओं को पहचानना और समझना, यह जानना कि वे किसी व्यक्ति के व्यवहार को किस हद तक प्रभावित करती हैं। इसमें अपनी भावनाओं पर नज़र रखना और विभिन्न भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का अवलोकन करना भी शामिल है। आत्म-जागरूकता में अपनी भावनाओं और व्यवहार के बीच के संबंध के प्रति सचेत रहना, अपनी खूबियों और कमज़ोरियों को जानना, नए अनुभवों और विचारों को अपनाना, सामाजिक मेल-जोल से सीखना शामिल है।

2. आत्म-नियंत्रण 

आत्म-नियमन में अपनी भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त करना, परिस्थितियों के अनुसार ढल जाना, परिवर्तन को अपनाना और मतभेदों को सुलझाना ,कठिन परिस्थितियों को संभालना शामिल है। साथ ही यह पहचानना कि किसी व्यक्ति के कार्यों का दूसरों पर कितना प्रभाव पड़ता है। यह भी देखना की अपने तथा दूसरों के आस-पास की स्थितियों एवं परिस्थितियों को किस प्रकार व्यवस्थित किया जाए।

3. स्व-प्रेरणा

यहाँ प्रेरणा’ का अर्थ है,आंतरिक प्रेरणा। खुद को प्रेरित करने और अपना विकास करने के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय, अपनी सफलताओं को ही अपने लिए प्रेरणा का मुख्य स्रोत बनाना है, क्योंकि यदि हम  दूसरों की बाहरी प्रेरणा और तारीफ़ पर निर्भर रहे, तो उनके रुक जाने पर उसका जीवन भी थम सकता है।

4. सहानुभूति

सहानुभूति का मतलब यहाँ पर दूसरों की भावनाओं को समझने और उन पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता के रूप में है। जीवन के कई पहलुओं के लिए यह घटक आवश्यक है, जिसमें कार्य-वातावरण को समझना, साथ ही संघर्ष और गलतफहमी को रोकना शामिल है।

जीवन में सबसे सफल लोग हमेशा सबसे ज़्यादा बुद्धिमान नहीं होते। आप ऐसे लोगों को जानते होंगे जो पढ़ाई-लिखाई में तो बहुत अच्छे होते हैं, लेकिन सामाजिक तौर पर उतने असरदार नहीं होते और न ही वे अपनी नौकरी या निजी रिश्तों में सफल हो पाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जीवन में सफल होने के लिए सिर्फ़ कॉग्निटिव इंटेलिजेंस (IQ) ही काफ़ी नहीं है। उदाहरण के लिए कॉग्निटिव इंटेलिजेंस (IQ) आपको कॉलेज में दाखिला दिलाने में मदद कर सकती है, वहीं इमोशनल इंटेलिजेंस आपको अपनी परीक्षाओं के समय तनाव और भावनाओं को संभालने में मदद करेगी। अच्छी बात यह है कि इमोशनल इंटेलिजेंस और कॉग्निटिव इंटेलिजेंस, दोनों को एक साथ विकसित करने से बहुत अच्छे नतीजे मिलते हैं।

इमोशनल इंटेलिजेंस से प्राप्त होने वाले लाभ 

1. व्यवसाय और शैक्षणिक प्रदर्शन

अच्छी भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) कार्यस्थल की सामाजिक कठिनाइयों से निपटने, दूसरों का नेतृत्व करने और उन्हें प्रेरित करने तथा व्यवसाय और शैक्षणिक सफलता प्राप्त करने में मदद करती है। किसी नौकरी के लिए जब बड़ी संख्या में उम्मीदवार आवेदन करते हैं, तो कई संगठन अब भावनात्मक बुद्धिमत्ता को तकनीकी और कॉग्निटिव एबिलिटी जितना ही महत्वपूर्ण मानते हैं।

2. शारीरिक स्वास्थ्य

जब कोई व्यक्ति अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाता, तो वह तनाव को भी नियंत्रित नहीं कर पाता, जिस वजह से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। तनाव ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है, इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। इसलिए, भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) को बेहतर बनाने में पहला कदम यह सीखना है कि तनाव को कैसे नियंत्रित किया जाए।

3. मानसिक स्वास्थ्य

अनियंत्रित भावनाएँ और तनाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालते हैं। इजिस वजह से  चिंता और निराशा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है। यदि अपनी भावनाओं को ना समझा जाये या उन्हें संभालना मुश्किल हो, तो मज़बूत रिश्ते बनाना कठिन हो जाता है जिस वजह से अकेलेपन और अलगाव की भावना पैदा हो सकती है और साथ ही मानसिक समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं।

4. मज़बूत संबंध 

जब आप अपनी भावनाओं के प्रति जागरूक हो जाते हैं और उन्हें नियंत्रित करना सीख जाते हैं, तो आप उन्हें व्यक्त करने में अधिक समर्थ हो जाते हैं। आप यह भी बेहतर ढंग से समझ पाते हैं कि दूसरे लोग क्या महसूस कर रहे हैं।  इससे आप अधिक प्रभावी ढंग से संवाद कर पाते हैं और अपने काम-काज के साथ-साथ निजी जीवन में भी रिश्ते मज़बूत बना पाते हैं।

5. सामाजिक बुद्धिमत्ता

भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सहानुभूति सामाजिक बुद्धिमत्ता को भी बढ़ाती है, जिससे आप दूसरे लोगों और अपने आस-पास की दुनिया से जुड़ पाते हैं। सामाजिक बुद्धिमत्ता आपको दोस्त और दुश्मन में फर्क करने, दूसरों की चिंताओं को समझने, तनाव कम करने, सामाजिक संपर्क के माध्यम से अपने नर्वस सिस्टम को संतुलित रखने और आत्मीयता, प्रेम व खुशी महसूस करने में सक्षम बनाती है।

जानें – माइंडफुलनेस क्या है

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About the Author: Kusum Kaushal

कुसुम कौशल ने उत्तराखंड में स्थित विश्वविद्यालय (हेमवती नंदन बहुगुणा यूनिवर्सिटी) से इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। हिंदी उनकी मूल भाषा है।

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