सरसों का तेल का भारतीय रसोई में एक महत्वपूर्ण स्थान है, इसका इस्तेमाल खाना पकाने, तलने और अचार बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है। आज कल खाने वाले तेलों में मिलावट एक आम समस्या हो गई है। इन तेलों में सस्ती चीज़ें मिला दी जाती हैं या उनकी शेल्फ़-लाइफ़ बढ़ाने और प्रोडक्शन कॉस्ट कम करने के लिए उन्हें बहुत ज़्यादा प्रोसेस किया जाता है।
शुद्ध सरसों के तेल खासकर कोल्ड-प्रेस्ड या वुड-प्रेस्ड तेल की सेहत के लिए अपनी विशेषताएँ होती हैं, यह मिलावट इनके फायदों को नुक्सान में बदल देती है। कुछ आसान तरीकों को जानकर बिना किसी लैब इक्विपमेंट के घर पर ही तेल की क्वालिटी की जाँच की जा सकती है।
नीचे घर पर शुद्ध सरसों के तेल की पहचान करने के सबसे अच्छे और आसान तरीके दिए गए हैं।
घर पर करें सरसों के तेल की शुद्धता की जाँच
1. पानी द्वारा टेस्ट
एक गिलास पानी लें, उसमे एक चम्मच सरसों का तेल डालें और 30 सेकंड तक मिलाएं। इसे 5-10 मिनट के लिए स्थिर छोड़ दें।अगर तेल ऊपर तैरता है और जल्दी घुलता नहीं है , तो वह शुद्ध है। यदि तेल जल्दी ही पानी में धुंधला या बिखरा हुआ सा दिखने लगे, तो इसमें मिलावट हो सकती है। एडिटिव्स या अन्य तेल की मिलावट, जैसे मिनरल ऑयल या कैस्टर ऑयल, इमल्सीफिकेशन या धुंधलापन पैदा कर सकते हैं। शुद्ध सरसों का तेल पानी में नहीं घुलता और हमेशा ऊपर एक परत बनाता है।
2. रेफ्रिजरेशन टेस्ट
नकली या मिलावटी सरसों के तेल की पहचान करने का एक तरीका रेफ्रिजरेशन टेस्ट है, जिसकी सलाह 2025 की फ़ूड सेफ्टी गाइड में भी दी गई है। शुद्ध सरसों का तेल, जिसमें सैचुरेटेड फैट और इरुसिक एसिड भरपूर मात्रा में होता है, 10°C (50°F) से कम तापमान पर गाढ़ा या धुंधला हो जाता है। नकली तेल में अक्सर सूरजमुखी या आर्जेमोन जैसे तेलों की मिलावट होती है, जो अपने अलग फैटी एसिड प्रोफ़ाइल के कारण तेल को तरल ही बनाए रखते हैं।
एक साफ़ गिलास में 2-3 बड़े चम्मच तेल डालें और इसे 4-6 घंटे के लिए रेफ्रिजरेटर में रख दें। शुद्ध तेल एक आधा गाढ़ा, मोम जैसी परत बना लेगा या धुंधला दिखेगा। अगर यह साफ़ और पतला ही रहता है, तो संभावना है कि इसमें सस्ते तेलों की मिलावट की गई है। यह टेस्ट भारत में सर्दियों के महीनों में खास तौर पर असरदार होता है, जब तेल का प्राकृतिक रूप से जमना साफ़ देखा जा सकता है।
3. तेल को गरम करके जांच
फ्लेम टेस्ट एक पुराना और भरोसेमंद तरीका है। इसमें तेल के जलने के तरीके को देखकर उसमें मौजूद मिलावट का पता लगाया जाता है। शुद्ध सरसों के तेल का फ्लैश पॉइंट (वह तापमान जिस पर तेल जलने लगता है) ज़्यादा होता है (लगभग 250°C)। यह जलते समय एक स्थिर, चमकदार लौ देता है और इसमें से हल्की, प्राकृतिक तेज़ सरसों की खुशबू आती है बहुत ज़्यादा झाग नहीं बनता।
रुई की बत्ती को तेल में भिगोएँ, उसे जलाएँ और ध्यान से देखें। असली तेल जलते समय स्थिर पीली लौ देता है और न तो काला धुआँ निकलता है और न ही तीखी केमिकल वाली गंध आती है। मिलावटी तेल, खासकर जिसमें मिनरल या सिंथेटिक चीज़ें मिली हों, जलते समय चटकने की आवाज़ करता है, कला धुंआ छोड़ता है । सरसों के तेल की शुद्धता की जाँच करने के लिए यह सबसे अच्छे तरीकों में से एक है।
4. खुशबू और स्वाद को देखकर पहचानना
असली सरसों के तेल की एक खास पहचान होती है, इसकी तेज़ और तीखी गंध होती है, इसमें मौजूद ‘एलिल आइसोथियोसाइनेट’ की वजह से ऐसा होता है। इसे जांचने के लिए, थोड़ा सा तेल हथेली में डालें और सूंघें। अगर गंध हल्की, बेअसर या केमिकल जैसी लगे, तो हो सकता है कि इसमें रिफाइंड तेल या दूसरी चीज़ें मिलाई गई हों।
स्वाद द्वारा चेक करने के लिए एक छोटी सी बूंद चखकर देखें। असली तेल का स्वाद तीखा होता है और गले में हल्की झनझनाहट महसूस होती है, जो इसमें मौजूद नैचुरल ‘इरूसिक एसिड’ की वजह से होता है। अगर स्वाद फीका या बहुत ज़्यादा चिकना लगे, तो हो सकता है कि इसमें पाम या अरंडी (कैस्टर) का तेल मिला हो।
असली तेल देखने में गहरे सुनहरे-पीले रंग का होता है, अगर इसे फ़िल्टर न किया गया हो तो यह थोड़ा धुंधला और थोड़ा गाढ़ा होता है। इसे रोशनी के सामने रखकर देखें – अगर यह बहुत ज़्यादा साफ़ दिखे या इसमें हरे रंग की झलक हो, तो हो सकता है कि यह असली न हो। यह तरीका बिना किसी खर्च के असली कोल्ड-प्रेस्ड सरसों के तेल की पहचान करने में मदद करता है।
5. हथेलियों पर रगड़कर टेस्ट
अपनी हथेलियों के बीच सरसों के तेल की एक बूंद रगड़ें। इसकी कुदरती तीखेपन की वजह से यह गर्म महसूस होनी चाहिए।
अगर यह बहुत ज़्यादा चिकनी या तैलीय लगे, तो हो सकता है कि इसमें कोई दूसरे तेल मिलाए गए हों।
6. तेल के रंग को देखकर परख
असली सरसों के तेल का रंग आमतौर पर गहरे सुनहरे-पीले से लेकर गहरे एम्बर (गहरे पीले-भूरे) रंग का होता है।
रिफाइंड या ब्लेंडेड तेल अक्सर ब्लीचिंग के कारण बहुत हल्के पीले और एक सामान पीले रंग के दिखते हैं।
7. नाइट्रिक एसिड टेस्ट (आर्जेमोन तेल की पहचान के लिए )
आर्जेमोन तेल एक खतरनाक मिलावट है जो भारत में ड्रॉपसी (dropsy) जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है। इसका पता नाइट्रिक एसिड टेस्ट से लगाया जा सकता है। इस तरीके को अपनाते समय सावधानी बरतें—दस्ताने पहनें और हवादार जगह पर करें, क्योंकि नाइट्रिक एसिड एक तेज़ केमिकल है।
एक टेस्ट ट्यूब में 5ml सरसों का तेल और 5ml कंसंट्रेटेड (गाढ़ा) नाइट्रिक एसिड मिलाएं। धीरे-धीरे हिलाएं और 2-3 मिनट तक इंतज़ार करें। शुद्ध सरसों का तेल हल्का पीला दिखेगा उसके रंग में कोई बदलाव नहीं आएगा। लाल-भूरा, नारंगी या गहरा लाल रंग आर्जेमोन तेल की मौजूदगी बताता है, क्योंकि इसके ज़हरीले एल्कलॉइड एसिड के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे मिलावट की पुष्टि होती है।
8. आयोडीन वैल्यू टेस्ट (अनसैचुरेटेड ऑयल ब्लेंड्स की जांच)
आयोडीन टेस्ट के जरिए उन मिलावटी मिश्रणों की पहचान की जा सकती है जिनमें सोयाबीन या राइस ब्रान जैसे अत्यधिक अनसैचुरेटेड तेलों का इस्तेमाल होता है, क्योंकि ये सरसों के तेल के प्राकृतिक फैट बैलेंस को बिगाड़ देते हैं। असली सरसों के तेल की आयोडीन वैल्यू मध्यम (100–120) होती है, जिस वजह से यह आयोडीन के साथ बहुत ही कम प्रतिक्रिया करता है।
इसे जांचने के लिए एक परखनली में 5 ml तेल लें और उसमें आयोडीन टिंचर की 2–3 बूंदें डालकर अच्छी तरह मिलाएं। शुद्ध तेल का रंग हल्का पीला-भूरा बना रहेगा, लेकिन यदि मिश्रण गहरा नीला-काला हो जाए, तो समझ लें कि इसमें अनसैचुरेटेड फैट वाले अन्य तेलों की मिलावट की गई है।
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