बीज –  नए सुपरफूड, जानिए कौन से बीज सेहत के लिए लाभदायक हैं 

बीज आसानी से उपलब्ध होने वाले और गुणों से भरपूर खाद्य पदार्थ हैं। बीज फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। इनमें स्वस्थ मोनोअनसैचुरेटेड फैट, पॉलीअनसेचुरेटेड फैट, कई महत्वपूर्ण विटामिन, मिनरल्स, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, भरपूर ऊर्जा और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। बीज ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं। नयी रिसर्च बीजों को भी सुपरफूड्स की श्रेणी में रखती है।

सभी अक्सर नट्स के पोषक तत्वों का ही गुण गान करते हैं, जबकि बीज भी निश्चित रूप से अपने पोषण तत्वों और गुणों के कारण बराबर की प्रशंसा के योग्य हैं।

वीगन डाइट अपनाने वाले बीजों को डेयरी-मुक्त दूध के विकल्प, जैसे तिल, क्विनोआ और फ्लैक्स मिल्क के रूप में अपना रहे हैं । इनका उपयोग पौधे-आधारित मांस विकल्पों के लिए भी किया जा रहा है, जिसमें कद्दू के बीज से बने टोफू इत्यादि शामिल हैं। आज कल सीड बटर विशेष रूप से सूरजमुखी, कद्दू, तिल के बीज के बटर की लोकप्रियता बढ़ रही है। 

बीजों को आहार में क्यों शामिल करना चाहिए?

  1. ये फाइबर का एक अच्छा स्रोत हैं, जो पाचन तंत्र को सही रखता है।
  2. ये गुड फैट प्रदान करते हैं, जो रक्त कोशिकाओं को पोषण देता है और मस्तिष्क के कार्य को बनाए रखने में मदद करता है।
  3. नट्स की तरह यह भी शरीर में इन्फ्लेमेशन के स्तर को कम करते हैं, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है और हृदय रोग के खतरे को कम करता है।
  4. इनमें प्लांट स्टेरोल्स होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखने और कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करते हैं।
  5. इनमें हमारे शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स जैसे की सेलेनियम, मैग्नीशियम, कॉपर और ज़िंक पाए जाते हैं।
  6. इनका नियमित रूप से सेवन करने से, वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
  7. बीज प्रोटीन खाद्य समूह का भी हिस्सा हैं।

 

कद्दू के बीज

कद्दू के बीज में जिंक, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, मैंगनीज, आयरन और कॉपर जैसे मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये पौधों पर आधारित प्रोटीन का स्त्रोत्र भी हैं। कद्दू के बीज एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो सेल्स को रोग पैदा करने वाले नुकसान से बचाते हैं और हमारे शरीर में सूजन को कम करते हैं। ये आहार फाइबर का भी एक बड़ा स्रोत हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि कद्दू के बीज के एंटी इंफ्लेमेट्री गुण  लिवर, मूत्राशय, आंत्र और जोड़ों के कार्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।

कद्दू के बीज दिल की सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट हमारे दिल की सेहत के लिए अच्छे हैं। कद्दू के बीज में मौजूद मैग्नीशियम रक्तचाप को कम करने में मदद करता है। मैग्नीशियम खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) के स्तर और ट्राइग्लिसराइड्स को भी कम करता है। इससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। कद्दू के बीज में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करता है। 

कद्दू के बीज में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है, जो कि ज्यादातर लोगों को आहार से पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता है। मैग्नीशियम डॉयबिटीज़ के खतरे को कम करते हुए, रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। अध्ययनों से पता चलता है कि कद्दू के बीज मधुमेह वाले लोगों को रक्त शर्करा (blood sugar ) को नियंत्रित बनाए रखने में भी मदद करते हैं। 

कद्दू के बीज कच्चे या भून कर खा सकते हैं। इसे ग्रेनोला बार, सलाद में या सूप में डालकर उपयोग कर सकते हैं। कद्दू के बीज की प्यूरी बनाकर या ब्लेंडर में कद्दू के बीज का मक्खन बनाकर भी उपयोग में लाया जा सकता है।

कलौंजी 

कलौंजी भारतीय, मध्य पूर्वी और उत्तरी अफ्रीकी व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है। सदियों से औषधीय गुणों के लिए इसकी प्रशंसा की जाती रही है।

यह काले रंग के बीज स्वाद में थोड़े कड़वे, चटपटे स्वाद वाले होते हैं। इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है। ये कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, कॉपर, ज़िंक और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट में भी समृद्ध हैं।

स्वादानुसार आलू या अन्य सब्जियों में इसका उपयोग कर सकते हैं। करी, दाल और चावल, पुलाव में डालकर भी खा सकते हैं। 

चिया सीड्स 

चिया सीड्स काले और सफेद दो किस्मों में आते हैं, लेकिन इनके पोषक तत्वों में कोई अंतर नहीं होता है। चिया सीड्स फाइबर और सेलेनियम (इम्युनिटी और मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मिनरल ) भरपूर मात्रा में है, इसमें ओमेगा -3 फैटी एसिड की भारी मात्रा होता है। चिया सीड्स प्रोटीन, कैल्शियम और मैग्नीशियम भी प्रदान करते हैं। चिया के बीज आहार में शामिल करने से कई बीमारियों के विकास को रोका जा सकता है। 

चिया सीड्स में मौजूद कैल्शियम हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। अध्ययनों से पता चलता है कि चिया सीड्स रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित रखते हैं। 

अलसी का बीज

अलसी में ओमेगा -3 फैटी एसिड, अल्फ़ा लिनोलेनिक एसिड, प्रोटीन, फाइबर, लिगनेन होते हैं। इसमें 25 %प्रोटीन, 30-40 % तेल, विटामिन बी, सेनेनिय, ज़िंक, आयरन, फोलेट, कॉपर, मेगनीशियम आदि तत्व होते है। इसलिए अलसी का हमारे स्वास्थ्य पर चमत्कारिक प्रभाव पड़ता है।

लिगनेन का अच्छा स्रोत्र होने के कारण इसे एंटी कैंसर भी माना जाता है। अलसी रक्त चाप को संतुलित रखती है। यह गुड कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ाती है ,ट्राईग्लिसराइट्स व् ख़राब कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करती है, यह हृदय की गति को भी नियंत्रित रखती है। यह महिलाओं में रजोनिवृति के दौरान होने वाली परेशानियों जैसे – हॉट फ्लेशसज़ इत्यादि में फायदेमंद है। इसमें फाइबर होने के कारण यह कब्ज़ जैसी समस्याओं को भी दूर करती है यह पित्त की थैली में पथरी बनने नहीं देती।अलसी हमारे मन को शांत रखती है , तनाव दूर करती है, स्मरणशक्ति को बढ़ाती है। यह मांसपेशियों की थकावट को दूर करती है और भरपूर शक्ति देती है।

क्विनोआ सीड्स 

क्विनोआ को अक्सर चावल के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है, क्विनोआ को आमतौर पर एक अनाज माना जाता है,  लेकिन यह वास्तव में एक बीज है। यह ऐमारैंथ परिवार के पौधे का बीज है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण भी हैं। क्विनोआ के पके हुए 1 कप सर्विंग में 8 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और 5 ग्राम फाइबर होता है, यह मिनरल्स भी प्रदान करता है। क्विनोआ में अन्य सभी सुपरसीड्स की तुलना में सबसे अधिक विविध फेनोलिक प्रोफाइल होता है।

क्विनोआ को सुपरफूड या सुपरग्रेन के रूप में जाना जाता है, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच यह काफी लोकप्रिय है। क्विनोआ प्रोटीन, फाइबर और विभिन्न विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है। यह ग्लूटेन-फ्री भी है और उन लोगों के लिए जिन्हे ग्लूटेन-एलर्जी है, वे इसे आहार में शामिल कर सकते हैं। पकने के बाद क्विनोआ फूल जाता है और नरम हो जाता है।

क्विनोआ को सब्जियां डालकर चावल की तरह पका कर भी खा सकते हैं।

पेरिला सीड्स

पेरिला पुदीना परिवार का पौधा है, इसकी खेती व्यापक रूप से कोरिया में होती है, इसलिए इसके बीजों को अक्सर कोरियाई पेरिला कहा जाता है। पेरिला के पत्तों का उपयोग ज्यादातर दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रों में किया जाता है। पेरिला के बीज पेरिला पौधे से प्राप्त होते हैं। पेरिला का उपयोग व्यंजनों में खुशबू के लिए और स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है, विशेष रूप से जापानी या कोरियाई खाद्य पदार्थों में। इसे भारत के कई पूर्वोत्तर राज्यों में एक मसाले के रूप में भी खाया जाता है।

पेरिला बीज पोषक तत्वों और स्वास्थ्य लाभों के लिए जाने जाते हैं। इनमें ओमेगा-3-6-9 जैसे हैल्दी फैट होते हैं।

पेरिला बीजों में लगभग 60% हैल्दी फैट मौजूद होता है, जबकि चिया के बीज में इसका आधा ही होता है। इसमें मौजूद ओमेगा -3 फैटी एसिड मस्तिष्क के कार्य में मदद करता है। ओमेगा 6 फैटी एसिड- यह ओमेगा -3 के संयोजन में काम करता है और त्वचा के लिए अच्छा है। पेरिला बीज में मौजूद ओमेगा-9 (ओलिक एसिड) हृदय स्वास्थ्य और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण है।

सभी सुपरसीड्स में से पेरिला और कलौंजी में कुल फेनोलिक कम्पाउंड या स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले फाइटोन्यूट्रिएंट्स सबसे अधिक होते हैं। पेरिला के बीज फाइबर, फोलेट, मैग्नीशियम, आयरन, कॉपर और जिंक से भी भरपूर होते हैं।

अध्ययन बताते हैं कि ओमेगा -3 फैटी एसिड वाले आहार, विशेष रूप से पेरिला तेल में पाया जाने वाला ईपीए और डीएचए हृदय रोग होने से बचाता है। यह मस्तिष्क के सेल्स बनाने में मदद करते है, याददाश्त को कमजोर होने से बचाते हैं , ये बीज अल्जाइमर या पार्किंसंस रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत अच्छे हैं। कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को कम करते हैं। ये कैंसर, गठिया, पार्किंसंस रोग, अस्थमा, ल्यूपस, मल्टीपल स्केलेरोसिस, विभिन्न त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट  (फेनोलिक कम्पाउंड , फ्लेवोनोइड्स और एंथोसायनिन) गुणों से भरपूर हैं। इसमें एंटी-एजिंग गुण पाए जाते हैं।  

तिल के बीज

तिल के बीजों में अन्य सभी सुपरसीड्स की तुलना में कैल्शियम, आयरन और कॉपर सबसे अधिक है। तिल के बीज प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, विटामिन बी6, विटामिन ई और अन्य मिनरल्स के भी अच्छे स्रोत हैं। तिल के बीज में लिग्नान और फाइटोस्टेरॉल होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं। फाइटोस्टेरॉल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाते हैं और कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करते हैं।

तिल में एंटी बेक्टेरियल गुण होते हैं ,इसमें सेसमिन और सेसमोलिन एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। एंटीऑक्सिडेंट स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, वे कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को धीमा करके शरीर को विभिन्न बीमारियों से बचाते हैं। अनुसंधान से पता चलता है कि तिल के बीज का तेल टाइप 2 डाइबिटीज़ की दवाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाता है।

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About the Author: Kusum Kaushal

कुसुम कौशल ने उत्तराखंड में स्थित विश्वविद्यालय (हेमवती नंदन बहुगुणा यूनिवर्सिटी) से इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। हिंदी उनकी मूल भाषा है।

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